Kesari Movie 21 The legend of the sacrifice of the warriors

For the last few years, the country has become almost a tradition of devotional films. The same link is being directed by Anurag Singh`s film Kesari. It is said that in the British Parliament of that time, 2 minutes silence was held in honor of the martyrs of Saragarhi. Based on this historic event, the film is Kesari. Director Anurag Singh retained his hold on every single frame of the film. However, expanding the story of the film was difficult, but due to the excellent screenplay, the film does not leave you any moment. The scenes created by the grandeur of the film make you enchanting. The film`s cinematography (Anshul Choubey) is amazing. If the editing department had cut it for another 20 minutes, the film would have become even more interesting.

 

This story is of the time of the British rule. It is known as the Battle of Saragarhi, which was fought on September 12, 1897 between the British and the Afghan Orazai tribes. It is now in the North-West Frontier Province (Khyber-Pakhtunkhwa) in Pakistan. Then there was the fourth battalion of the 36 Sikh Regiment in the British British Army, in which 21 Sikhs were attacked, 10000 Afghans attacked. Havaldar Eshar Singh, who led the Sikhs, decided to fight till death. It is considered one of the greatest end in wars in history in military history.

 

 

 

Due to the manner in which the director Anurag Singh used humor in the war-based film, it is worthwhile. And despite the British Indian army being the biggest thing, Anurag, in the context of today, has thronged the country`s love, it is indeed commendable.

 

Talking about acting, Akshay Kumar looks completely dyed in his role. It does not seem to him that he is not Ishara Singh.

पिछले कुछ समय से देश भक्ति की फिल्मों की लगभग परंपरा सी बन गई है उसी कड़ी को निर्देशक अनुराग सिंह की फिल्म केसरी आगे बढ़ा रही है। कहा जाता है उस समय की ब्रिटिश संसद में भी सारागढ़ी के शहीदों के सम्मान में 2 मिनट का मौन रखा गया था। इस ऐतिहासिक घटना पर आधारित फिल्म है केसरी। निर्देशक अनुराग सिंह ने फिल्म के हर एक फ्रेम पर अपनी पकड़ बनाए रखीl हालांकि फिल्म की कथा का विस्तार करना मुश्किल काम था लेकिन बेहतरीन स्क्रीनप्ले के कारण फिल्म आपको एक भी पल नहीं छोड़ती। फिल्म जिस भव्यता से बनाई गई है वो दृश्य आपको मंत्रमुग्ध कर देते हैं। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी (अंशुल चौबे) कमाल की है। एडिटिंग डिपार्टमेंट अगर इसे और 20 मिनट काट देता तो शायद फिल्म और भी रोचक बन पड़ती।

 

यह कहानी है अंग्रेजी हुकूमत के समय की है। इसे बैटल ऑफ़ सारागढ़ी के नाम से जाना जाता है, जो 12 सितम्बर 1897 को अंग्रेजों और अफ़गान ओराक्ज़ई जनजातियों के बीच लड़ा गया था। यह अब के पाकिस्तान में स्थित उत्तर-पश्चिम फ्रण्टियर प्रान्त (खैबर-पखतुन्खवा) में हुआ। तब सिख ब्रिटिश फ़ौज में 36 सिख रेजिमेंट की चौथी बटालियन थी जिसमें 21 सिख थे, जिन पर 10000 अफ़्ग़ानों ने हमला किया था । सिखों का नेतृत्व कर रहे हवालदार ईशर सिंह ने मरते दम तक लड़ने का फैसला किया । इसे सैन्य इतिहास में इतिहास के सबसे महान अन्त वाले युद्धों में से एक माना जाता है।

 

निर्देशक अनुराग सिंह ने युद्ध पर आधारित इस फिल्म में जिस तरह ह्यूमर का इस्तेमाल किया है तारीफे काबिल है। और सबसे बड़ी बात ब्रिटिश इंडिया की फौज होने के बावजूद जिस तरह अनुराग ने उसमें आज के परिपेक्ष में देश प्रेम को पिरोया है, वह वाकई सराहनीय है।

 

अभिनय की बात करें तो अक्षय कुमार अपने किरदार में पूरी तरह से रंगे नजर आते हैं। उन्हें देखकर लगता ही नहीं है कि वो ईशर सिंह नहीं है। उनकी पत्नी बनी परिणीति चोपड़ा थोड़े से समय के लिए आती है, मगर अपना प्रभाव छोड़ जाती है। इसके अलावा टीम के हर सदस्य ने अपना अपना किरदार पूरी ईमानदारी से निभाया है।

 

 

कुल मिलाकर केसरी एक रोचक फिल्म है जो आपको बांधे रखती है आप इस फिल्म का आनंद सपरिवार ले सकते हैं